नमस्ते देवि गायत्रि सावित्रि त्रिपदेSक्षरे।
श्रीगायत्रीस्तोत्रम् नमस्ते देवि गायत्रि सावित्रि त्रिपदेऽक्षरे । अजरे अमरे मातस्त्राहि मां भवसागरात् ॥ १॥ नमस्ते सूर्यसङ्काशे सूर्यसावित्रि कोमले । ब्रह्मविद्ये…
Read Moreश्रीगायत्रीस्तोत्रम् नमस्ते देवि गायत्रि सावित्रि त्रिपदेऽक्षरे । अजरे अमरे मातस्त्राहि मां भवसागरात् ॥ १॥ नमस्ते सूर्यसङ्काशे सूर्यसावित्रि कोमले । ब्रह्मविद्ये…
Read Moreगोष्पदीकृतवारिशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देSनीलात्मजम्।। अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम्।। गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्॥ अर्थ: मैं उन हनुमान जी की…
Read Moreयह वाक्य सूर्य अष्टकम से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''महान प्रकाशक, जगत के कर्ता, महान तेज से प्रकाशित…
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