एहि मुरारे कुञ्जबिहारे एहि प्रणतजनबन्धो।
यह एक संस्कृत वाक्यांश है जिसका अर्थ है “हे मुरारी, हे कुंजबिहारी, हे प्रणतजनों के बंधु, आइए।” यह गीत गोविंद…
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Read Moreयह “सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्” सूर्याष्टकम् का एक श्लोक है, जिसका अर्थ है: “सात घोड़ों के रथ पर सवार, प्रचंड, कश्यप…
Read Moreनीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं” का अर्थ है नीले कमल के समान श्याम और कोमल अंग वाले। यह भगवान राम के लिए एक विशेषण…
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