तं सूर्यं जगतकर्तारं महातेजप्रदीपनम्।

तं सूर्यं जगतकर्तारं महातेजप्रदीपनम्।

यह वाक्य सूर्य अष्टकम से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''महान प्रकाशक, जगत के कर्ता, महान तेज से प्रकाशित
उन सूर्य देव को मैं नमस्कार करता हूँ".यह सूर्य देव की स्तुति है, जिसमें उन्हें जगत का कारण 
और महान प्रकाशक बताया गया है. 
  • यह वाक्य "तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज:प्रदीपनम्। महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।" का हिस्सा है,
    जो सूर्याष्टकम् का एक श्लोक है.
    तं सूर्यं: उन सूर्य को
  • जगत्कर्तारं: जगत का कर्ता, अर्थात जो इस संसार की रचना करने वाले हैं
  • महातेज:प्रदीपनम्: महान प्रकाश से प्रकाशित
  • महापापहरं: बड़े-बड़े पापों को हरने वाले
  • देवं: देव, अर्थात देवततं सूर्यं प्रणमाम्यहम्: उन सूर्य देव को मैं नमस्कार करता हूँ.
यह श्लोक सूर्य देव की स्तुति करता है, उन्हें जगत का कारण, महान प्रकाशक और पापों को हरने वाला बताता है. 
सूर्य देव को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है, और उन्हें प्रकाश, 
ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना जाता है. 
तं सूर्यं जगतकर्तारं महातेजप्रदीपनम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।

Top ten astrologers in India – get online astrology services from best astrologers like horoscope services, vastu services, services, numerology services, kundli services, online puja services, kundali matching services and Astrologer,Palmist & Numerologist healer and Gemstone,vastu, pyramid and mantra tantra consultant

Currency
Translate
X