संबंधित रत्न

संबंधित रत्न

लहसुनिया

लहसुनियाजिसे अंग्रेजी में कैट्स आई कहा जाता है, केतु से संबंधित रत्न है। ज्योतिषशात्रियों के अनुसार इस रत्न को धारण करने से जातक केतु ग्रह के बुरे प्रभाव से बच सकता है और अगर किसी के लिए केतु फलदायी होने के बावजूद कमजोर है, तो इस ग्रह को धारण करने से उसे मजबूती मिल सकती है।
केतु की महादशा

जब किसी जातक के जीवन में केतु की महादशा चल रही हो तो उसके लिए यह रत्न धारण करना लाभकारी सिद्ध होता है।
कैट्स आई

वृषभ, मकर, तुला, कुंभ, मिथुन राशि के जातकों के लिए केतु से संबंधित कैट्स आई पहनना बहुत शुभ होता है।
कैट्स आई

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार जो लोग लहसुनिया या कैट्स आई पहनते हैं उन्हें कभी किसी की बुरी नजर नहीं लगती।
बुरे स्वप्न

इसे धारण करने से आपको कभी बुरे स्वप्न नहीं सताते और ना ही कभी डर लगता है।
आर्थिक तंगी

अगर जीवन में आर्थिक तंगी है तो अच्छे ज्योतिषशास्त्री से पूछकर लहसुनिया रत्न धारण किया जा सकता है। कैट्स आई पहनने से दरिद्रता से मुक्ति मिलती है।
लहसूनिया

लहसुनिया को पहनने के क्या-क्या फायदे हैं ये तो हमने आपको बता दिए, अब बताते हैं इस रत्न को किस तरह पहना या धारण किया जा सकता है।
चांदी की धातु

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार लहसुनिया पहनने के लिए चांदी की धातु का प्रयोग किया जाना चाहिए। चांदी में जड़वाकर इसे दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण किया जाना चाहिए।
शुभ मुहुर्त

लहसुनिया जड़ित अंगूठी धारण करने का सबसे अच्छा दिन है सोमवार, इसे सोमवार को किसी शुभ मुहुर्त में धारण किया जाना अत्यंत लाभकारी है।

रंक को भी राजा बना देगा यह नीलम

रत्नों के संसार की यात्रा में आइए आज आपको परिचय कराए सबसे लोकप्रिय रत्न नीलम से। नौ मुख्य रत्नों में एक माने जाने वाला नीलम अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में लोकप्रिय है। इसकी कीमत और खूबसूरती को देखते हुए कुछ लोग इसे नीला हीरा भी कहते हैं।
शनि

ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को न्यायदाता माना गया है। शनि में एकाएक भाग्य बदलने की क्षमता होती है। यह किसी के भाग्य पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही रूप में सशक्त प्रभाव दिखाते हैं।
नीलम से बनते राजयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृष लग्न और तुला लग्न वाले जातको के लिए नीलम परम राजयोग कारक होता है जिसके प्रयोग से उनके जीवन में अपार खुशियों का आगमन होता है।
शनिवार का दिन

अगर यह शुभ फल दें तो इसे हमेशा धारण किए रहना चाहिए। इसे धारण करने के लिए शनिवार का दिन ही शुभ माना जाता है। अधिकांश ज्योतिषी मानते हैं कि तीन से छः रत्ती का नीलम स्वर्ण या फिर पंच धातु में जड़वाकर शनिवार के दिन दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण किया जाए तो शुभ फल प्राप्त होता है।

पन्ना की खूबसूरती

हरे रंग के इस चमकीले रत्न का गुणगान सदियों से होता आ रहा है। इसे मरकत मणि, हरितमणि, एमराल्ड, पांचू आदि नामों से भी जाना जाता है। गरुड़ पुराण में इसके गुणों के संदर्भ में विस्तार से चर्चा की गई है।

पन्ना और बुध ग्रह का संबंध

अगर हम इसके ज्योतिषीय गुणों की बात करें तो इसे बुध ग्रह का रत्न माना जाता है। मिथुन तथा कन्या राशि के जातकों के लिए पन्ना रत्न अत्याधिक लाभकारी माना जाता है। अगर कुंडली में बुध की स्थिति कमजोर है तो यह उसे बल प्रदान करता है।

पन्ना और बुध ग्रह का संबंध

बुध की पीड़ा शांत करने के लिए भी कुछ लोग इसको धारण करने की सलाह देते हैं। अगर बुध की महादशा या अंतरदशा चल रही हो तो पन्ना अवश्य पहनना चाहिए। बुध कुंडली में अगर मंगल, शनि और राहु या केतु के साथ हो या बुध पर शत्रु ग्रहों की दृष्टि हो तो भी पन्ना जरूर पहनना चाहिए।

इस्तेमाल करने का तरीका

पन्ना बुध ग्रह से संबंधित होने के कारण छात्रों के लिए अति उत्तम माना जाता है। यह एकाग्रता और स्मरण शक्ति को तीव्र बनाता है।

इसके फायदे

अगर आपकी राशि में बुध अनुकूल होगा तो आपको व्यापार या कार्यक्षेत्र में भी सफलता मिलेगी।

इसके फायदे

इसके अलावा पन्ना धारण करने से रोगों से मुक्ति , अन्न-धन की वृद्धि, सुयोग्य संतान और भूत प्रेत की बाधा शांत होती है। यह भी माना जाता है पन्ना घर में रखने से सांप का भय भी नहीं रहता।
कब और कैसे करें धारण

पन्ना धारण करने के लिए बुधवार का दिन सबसे शुभ होता है। अगर बुधवार को अश्लेषा, रेवती, पूर्वाफाल्गुनी अथवा पुष्य नक्षत्र हो तो और उत्तम रहता है। लेकिन एक बार याद रखें कि पन्ना धारण करते कुंडली में बुध की स्थिति पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।

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