संतान दोष के ज्योतिषीय कारण
संतान दोष के ज्योतिषीय कारण
May 28, 2019
संतान दोष के ज्योतिषीय कारण और उसके उपाय :-
संतान सुख का योग किसी भी दंपत्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जब संतान प्राप्ति में बाधा आती है, तो उसके पीछे कई ज्योतिषीय कारण हो सकते हैं। जन्म कुंडली (Horoscope) का विश्लेषण करके यह जाना जा सकता है कि संतान सुख में क्या दोष है और उसका समाधान क्या हो सकता है।
🔯 संतान दोष के मुख्य ज्योतिषीय कारण:
1. पंचम भाव (5th House) में दोष
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पंचम भाव संतान का मुख्य स्थान है।
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यदि पंचम भाव में अशुभ ग्रह जैसे शनि, राहु, केतु या मंगल का प्रभाव हो, तो संतान सुख में बाधा आती है।
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पंचम भाव का स्वामी नीच का हो या पीड़ित हो, तो भी संतान में रुकावट आती है।
2. गुरु (बृहस्पति) की स्थिति
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गुरु बच्चों के कारक ग्रह होते हैं।
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यदि गुरु नीच का हो, शत्रु राशि में हो, या राहु-केतु से ग्रसित हो, तो संतान संबंधी परेशानियाँ आती हैं।
3. शुक्र की स्थिति
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शुक्र प्रजनन क्षमता (Fertility) से जुड़ा ग्रह है।
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यदि शुक्र अशुभ स्थिति में हो, तो संतान प्राप्ति में रुकावट होती है।
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शुक्र और गुरु दोनों पीड़ित हों, तो यह गंभीर संतान दोष दर्शाता है।
4. सप्तम भाव और अष्टम भाव में दोष
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सप्तम भाव विवाह और दाम्पत्य जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।
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यदि सप्तम भाव में राहु-केतु या शनि जैसे ग्रह हों, तो संतान में देरी होती है।
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अष्टम भाव रोग, बाधा और अनचाही रुकावटें दर्शाता है – यहाँ दोष होने से गर्भधारण में समस्याएँ आती हैं।
5. कुंडली में पितृ दोष / कालसर्प दोष
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पितृ दोष (Pitru Dosh) या कालसर्प दोष भी संतान प्राप्ति में बाधक होते हैं।
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विशेषकर यदि राहु पंचम या नवम भाव में हो और गुरु पीड़ित हो, तो यह गंभीर संतान दोष दर्शाता है।
6. गर्भस्थ ग्रह दोष (Transit Issues)
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गोचर में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, और वह गुरु या पंचम भाव को प्रभावित कर रही हो, तो गर्भधारण में समस्या आ सकती है।
🌿 समाधान (Astrological Remedies):
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पंचम भाव का शुद्धिकरण करवाएं।
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गुरु और शुक्र को बल देने के लिए पूजा, व्रत या रत्न धारण करें।
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राहु-केतु के लिए कालसर्प दोष निवारण पूजा करें।
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पितृ दोष शांति हेतु श्राद्ध व तर्पण करें।
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संतान गोपाल मन्त्र या संतति प्राप्ति मन्त्र का जाप करें।
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योग्य ज्योतिषी से कुंडली मिलान करवाकर संतान योग की पुष्टि करवाएं।
काफी महिलाएं ऐसी हैं जो मां बनने के सुख से वंचित हैं। यदि पति-पत्नी दोनों ही स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम हैं फिर भी उनके यहां संतान उत्पन्न नहीं हो रही है। ऐसे में संभव हैकि ज्योतिष संबंधी कोई अशुभ फल देने वाला ग्रह उन्हें इस सुख से वंचित रखे हुए है। यदि पति स्वास्थ्य और ज्योतिष के दोषों से दूर है तो स्त्री की कुंडली में संतान संबंधी कोई रुकावट हो सकती है।
हर विवाहित स्त्री चाहती हैं कि उसका भी कोई अपना हो जो उसे मां कहकर पुकारे। सामान्यत: अधिकांश महिलाएं भाग्यशाली होती हैं जिन्हें यह सुख प्राप्त हो जाता है।
जन्म कुंडली से संतान सुख का विचार :–
ज्योतिष के प्राचीन फलित ग्रंथों में संतान सुख के विषय पर बड़ी गहनता से विचार किया गया है | भाग्य में संतान सुख है या नहीं ,पुत्र होगा या पुत्री अथवा दोनों का सुख प्राप्त होगा ,संतान कैसी निकलेगी ,संतान सुख कब मिलेगा और संतान सुख प्राप्ति में क्या बाधाएं हैं और उनका क्या उपचार है , इन सभी प्रश्नों का उत्तर पति और पत्नी की जन्म कुंडली के विस्तृत व गहन विश्लेषण से प्राप्त हो सकता है |
ज्योतिष के अनुसार संतान उत्पत्ति में रुकावट पैदा करने वाले योग-
– जब पंचम भाव में का स्वामी सप्तम में तथा सप्तमेश सभी क्रूर ग्रह से युक्त हो तो वह स्त्री मां नहीं बन पाती।
– पंचम भाव यदि बुध से पीडि़त हो या स्त्री का सप्तम भाव में शत्रु राशि या नीच का बुध हो तो स्त्री संतान उत्पन्न नहीं कर पाती।
– पंचम भाव में राहु हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो, सप्तम भाव पर मंगल और केतु की नजर हो, तथा शुक्र अष्टमेश हो तो संतान पैदा करने में समस्या उत्पन्न होती हैं।
– सप्तम भाव में सूर्य नीच का हो अथवा शनि नीच का हो तो संतानोत्पत्ती में समस्या आती हैं।
संतान प्राप्ति हेतु क्या करें ज्योतिषीय उपाय-
यदि किसी युवती की कुंडली यह ग्रह योग हैं तो इन बुरे ग्रह योग से बचने के लिए उन्हें यह उपाय करने चाहिए:
पहला उपाए: संतान गोपाल मंत्र के सवा लाख जप शुभ मुहूर्त में शुरू करें। साथ ही बालमुकुंद (लड्डूगोपाल जी) भगवान की पूजन करें। उनको माखन-मिश्री का भोग लगाएं। गणपति का स्मरण करके शुद्ध घी का दीपक प्रज्जवलित करके निम्न मंत्र का जप करें। मंत्र- ऊं क्लीं देवकी सूत गोविंदो वासुदेव जगतपते देहि मे, तनयं कृष्ण त्वामहम् शरणंगता: क्लीं ऊं।।
दूसरा उपाए: सपत्नीक कदली (केले) वृक्ष के नीचे बालमुकुंद भगवान की पूजन करें। कदली वृक्ष की पूजन करें, गुड़, चने का भोग लगाएं। 21 गुरुवार करने से संतान की प्राप्ती होती है।
तीसरा उपाए: 11 प्रदोष का व्रत करें, प्रत्येक प्रदोष को भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करने से संतान की प्राप्त होती है।
चौथा उपाए: गरीब बालक, बालिकाओं को गोद लें, उन्हें पढ़ाएं, लिखाएं, वस्त्र, कापी, पुस्तक, खाने पीने का खर्चा दो वर्ष तक उठाने से संतान की प्राप्त होती है।
पांचवां उपाए: आम, बील, आंवले, नीम, पीपल के पांच पौधे लगाने से संतान की प्राप्ति होती है।
कुछ अन्य प्रभावी उपाय —
– हरिवंश पुराण का पाठ करें।
– गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें।
– पंचम-सप्तम स्थान पर स्थित क्रूर ग्रह का उपचार करें।
– दूध का सेवन करें।
– सृजन के देवता भगवान शिव का प्रतिदिन विधि-विधान से पूजन करें।
– किसी बड़े का अनादर करके उसकी बद्दुआ ना लें।
– पूर्णत: धार्मिक आचरण रखें।
– गरीबों और असहाय लोगों की मदद करें। उन्हें खाना खिलाएं, दान करें।
– किसी अनाथालय में गुप्त दान दें।
