शनि राहु और केतु

शनि राहु और केतु

यूं तो कुंडली में सभी 9 ग्रह मानव जीवन को दिशा देने में अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं, समत-समय पर सभी की दशा, महादशा, अंतर्दशा चलती रहती है। लेकिन इनमें से कुछ ग्रह ऐसे भी हैं जिनका नाम ही भयभीत कर देता है।

शुभ फल
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जहां कुछ ग्रह अपने शुभ फल देने के लिए कुंडली में बैठे होते हैं वहीं शनि, राहु और केतु कुछ ऐसे ग्रह हैं जिनकी प्लेसमेंट या स्थिति कुण्डली में शुभ ना हो तो ये समस्या का बड़ा कारण बन सकते हैं।

शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, वे हमारे कर्मों के अनुसार ही हमें दंड देते हैं।

राहु
लेकिन जब राहु की बात आती है तो यह एक ऐसा ग्रह हैं जो हमसे स्वयं कर्म भी करवाता है और फिर उन्हीं कर्मों के आधार पर हमें दंड भी देता है। राहु को आकस्मिक ग्रह का करार दिया गया है, इसके पीछे कारण यह है कि अपनी दशा के किस पड़ाव पर आकर यह अपना प्रभाव दर्शाएगा इस बात को समझना बहुत मुश्किल होता है।

तीव्र प्रभाव
इसलिए जहां बाकी ग्रहों के लिए किए जाने वाले उपचार निर्धारित समय पर शुरू होते हैं वहीं राहु एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसके लिए उपचार उसकी दशा आने से कुछ समय पहले ही शुरू कर देने चाहिए, ताकि जब उसकी दशा आए तो वह उतना तीव्र ना हो जितना हो सकता है।

लालच
राहु को लालच का नाम दिया गया है, जिस भी व्यक्ति की कुंडली में इसकी दशा शुरू होती है वह अपना अच्छा-बुरा कुछ नहीं समझ पाता। वह एक लालच का शिकार हो जाता है और उसे अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नजर नहीं आता।

ज्योतिष विद्या के अंतर्गत राहु को “भ्रम” माना गया है। इसलिए जिस भी व्यक्ति की कुंडली में राहु की बैठकी अशुभ है और जब इसकी दशा चलती है तो वह बुरी लत का शिकार हो जाता है, उसका उठना-बैठना बुरे लोगों में होता है। उसकी अंतरआत्मा जानती है कि वह गलत कर रहा है लेकिन फिर भी वह भ्रमित होकर वही कार्य करता रहता है।

राहु और केतु
यूं तो राहु और केतु को समान संज्ञा दी गई है लेकिन जहां केतु का परिणाम निश्चित होता है वहीं राहु दुविधा, असमंजस और भ्रम फैलाता है। राहु भ्रम है इसलिए इसे ज्योतिष की भाषा में छाया ग्रह माना गया है। चलिए जानते हैं छाया ग्रह के नाम से चर्चित राहु की विशेषताएं।

सप्तम भाव
आमतौर पर प्रेम संबंधों के विषय में माना जाता है कि इनके लिए शुक्र ग्रह उत्तरदायी होता है। लेकिन अगर आपके पंचम या सप्तम भाव पर राहु की दृष्टि हो या बैठा हो या किसी भी तरह का प्रभाव हो तो उस संबंध की नियति राहु द्वारा ही निर्धारित होती है।

प्रेमी-प्रेमिका
ऐसे प्रेम संबंध जब प्रेमी-प्रेमिका को समाज के डर से छिप-छिपकर मिलना पड़ता है राहु की ही देन है। इसके अलावा ऐसे विवाहित या प्रेम संबंध जो नुकसानदेह साबित हो सकते हैं, लेकिन फिर भी हम भ्रमित होकर उनके जाल में ना सिर्फ फंस जाते हैं बल्कि उसे ही अपना जीवन मानने लगते हैं, यह सब राहु की दशा में ही अधिक होता है।

झूठ पर कायम
राहु एक ऐसा झूठ माना गया है जो झूठ होते हुए भी सच लगता है। इंसान जानते हुए भी इसके जाल में फंसता चला जाता है। संबंधों में रहस्यों का मौजूद होना भी राहु की ही देन है। राहु ना सिर्फ इंसान को झूठ बोलना सिखाता है कि उस झूठ पर कायम रहना और दूसरों को अपने विश्वास में लेकर उन्हें धोखा देना भी सिखाता है।

राहु का कार्य
राहु का कार्य सत्य को सामने ना आने देना है ताकि व्यक्ति झूठ और रहस्य के जंजाल में ही फंसा रहे। जबकि केतु का कार्य झूठ का पर्दाफाश करना है इसलिए केतु की दशा में वे रहस्य और झूठ भी उजागर होते हैं जिन्हें राहु छिपाकर रखना चाहता है।

केतु
केतु को दरार कहा गया है, यह संबंध को खत्म कर देता है। घर में भी अगर दरार पड़ जाए तो यह मान लेना चाहिए कि घर में केतु का प्रभाव है। घर का बंटवारा, संबंधों में दरार, यह सब केतु का काम है जबकि राहु किसी नतीजे तक नहीं पहुंचने देता, भ्रमित करके दुविधा में ही रखता है।

कुंडली
जिस भी व्यक्ति की कुंडली में राहु बलवान है तो वह छिपे रहस्यों की तह तक पहुंच पाने भी सफल हो जाता है। गुप्त बातों को जानने में आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी

आकस्मिक घटना
अगर आपके पीठ-पीछे बोलने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, लोग आपसे बातें छिपाने लगे हैं तो यह सब राहु की वजह से ही होता है। जीवन में घटित होने वाली किसी भी आकस्मिक घटना के लिए राहु ही जिम्मेदार होता है।

धोखा देने की प्रवृत्ति
राहु आपके मस्तिष्क में धोखा देने की प्रवृत्ति भी पैदा करता है और आपको इस धोखे के लिए पकड़वाता भी है। अगर आपका भाग्येश निर्बल है तो ऐसी स्थिति का सामना आपको बार-बार करना पड़ सकता है।

कुकर्मों की सजा
राहु की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आपसे स्वयं कुकर्म करवाता है और फिर इन्हीं कुकर्मों की सजा आपको देता है।

एकतरफा प्रेम
राहु एकतरफा प्रेम का भी रूप है। व्यक्ति एकतरफा प्रेम में तो पड़ जाता है लेकिन अपने दिल की बात बता नहीं पाता। वह सिर्फ तड़पता रहता है। झूठ, असत्य और पाखंड ओर से जुड़े प्रेम संबंधों का कारण भी राहु ग्रह ही है।

राहु की दशा में आपके साथ कब क्या हो जाएगा यह स्वयं ज्योतिष शास्त्री भी नहीं बता सकता। इसलिए पहले से ही सावधान रहने की जरूरत होती
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ज्योतिष की दृष्टि में राहु
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राहु :यह एक छाया ग्रह ।
गले के ऊपरी भाग पर राहु का
बाकी नीचे का केतु का स्वामित्व या अधिकार है

कन्या राशि :स्वराशि।
मिथुन राशि में उच्च व धनु में नीच का होता है।

मित्र ग्रह :शनि, बुध व शुक्र ।

शत्रु ग्रह :सूर्य, चंद्र, मंगल व गुरु ।
तामसिक ग्रह।
कारक तत्वों : मतिभ्रम, छल-कपट, झूठ बोलना, चोरी, तामसिक भोजन, षड्यंत्र, छिपे शत्रु, अनैतिक कर्म, आकस्मिकता, नकारात्मक सोच,

शुभ फलकारक:शनि, शुक्र ,बुध के लग्नेश होने पर मित्रता के कारण राहु
शुभफल कारक

शत्रु फलकारक:
सूर्य, चंद्र, मंगल व चंद्रमा के लग्नेश होने के कारण कुछ अशुभ

राहु की भावफलदायक : जन्मकुंडली में तृतीय, षष्ठ व एकादश भाव में राहु उत्तम फलदायक रहता है।

अच्छा फलदायक : 1,लग्न, 5,पंचम,9, नवम, 10,दशम भाव में।

मध्यम फलदायक :2,द्वितीय व 7, सप्तम में 4, चतुर्थ ।

अनिष्टकारक :8,अष्टम व12, द्वादश भाव ।
फलादेश के लिये : राहु मित्र ग्रह की राशि में है या शत्रु की राशि में।

राहु किसी भी भाव में शत्रु राशि में हो उस भाव की हानि करेगा और यदि मित्र राशि में है तो सहायक होगा।

ग्रहों से युति का फल:
राहु सूर्य युति : पिता का सुख नहीं मिलेगा, या कमज़ोर होगा
पुत्र सुख में भी कमी होगी,
प्रसिद्धि व प्रतिष्ठा मे कमी ,
आत्मविश्वास मे कमी , यश मे कमी ।

राहु चंद्रमा युति : माता के सुख मे कमी
मानसिक रूप से अशांत।
एकाग्रता की कमी।.
अवसाद में आना ।
चिंता करना ।
व्याकुलता व घबराहट से परेशान।

राहु मंगल युति : अनिष्टकारी ,क्रोधी व अहंकारी होती है।
दुर्घटना, शत्रु बाधा ,लड़ाई झगड़े । वैवाहिक जीवन में समस्याएं ।

राहु बुध युति : निर्णय क्षमता में कमी। शिक्षा में उतार-चढ़ाव।
अगर 2 हाउस में हो तब वाणी दोष भी बनता है परिवार से दूरी बनेंगी

राहु गुरु युति : गुरु चांडाल दोष बनता है ।
विवेक में कमी, शिक्षा में बाधा ।
संतान सुख में बाधायें। प्रतिभा कम होती है। उन्नति में भी बाधायें।

राहु शुक्र युति : तामसिक विलासिता शराब औऱ अन्य नशे की आदत।
प्रेम-विवाह, अन्तर्जातीय विवाह भी हो सकता है।

राहु शनि युति : आकस्मिक लाभ भी हो सकता है।
चतुराई से लाभ। पर आजीविका में कुछ संघर्ष ।

राहु की महादशा का फल:
अनिष्टकारक होगी या शुभ कारक।
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राहु अशुभ स्थिति में है तो निश्चित ही अनिष्टकारी होगा। शुभ स्थिति में होने पर उतना ही आकस्मिक लाभ करायेगा।जीवन में सभी सुख सुविधाएँ होंगी
कुंडली में राहु 4,चतुर्थ, 8,अष्टम या 12,यानी द्वादश भाव में स्थित है तो राहु की दशा अशुभ फल कारक होगी।

कुंडली के अकारक ग्रहों 6, षष्ठेश, 8,अष्टमेश व 12,द्वादशेश भाव के मालिकों से द्रस्तिगत या युत राहु भी अशुभ फलकारक होगा।

जैसे ग्रहों के प्रभाव में होगा वैसा ही फल करेगा।
कुंडली में राहु 3,तृतीय, 6षष्ठ व 11, एकादश भाव में है तो अपनी दशा में शुभकारक होगा।
अगर 1,5,9,11 यानी लग्न, पंचम, नवम, दशम भाव में भी शुभ है।

कुंडली के शुभकारक ग्रह1,5,9 यानी लग्नेश, पंचमेश व नवमेश से दृष्ट या युत राहु दशा में शुभ फलकारक होगा।

कुंडली में राहु अशुभ स्थिति में है तो उसकी दशा में , मन में अशांति , मन चलायमान , व्यक्ति मतिभ्रम , गलत निर्णय ,कर्म तथा लक्ष्य से भटकना , बुरी आदतों का शिकार,बड़ों का कहना न मानना , लापरवाही के कारण असफलता आदि होगा ।

राहु शुभ स्थिति में है तो ऐसे राहु की दशा में व्यक्ति को आकस्मिक लाभ अवश्य होते हैं तथा व्यक्ति थोड़े समय में ही अप्रत्याशित उन्नति कर लेता है और सभी रूके कार्य इस समय में स्वतः ही पूरे हो जाते हैं।

राहु के अनिष्ट फल से बचने के उपाय:

ऊँ रां राहवे नमः का प्रतिदिन एक माला जाप करें।
दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
पक्षियों को बाजरा खिलायें ।
धान्य का दान करते रहें।
शिवलिंग को जलाभिषेक करें।
र्नैत्य कोण S/ W दिशा में पीले रंग के फूल लगाना ठीक रहता है ।
तामसिक आहार व नशा नही करना चाहिए ।

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