लहसुनिया रत्न किस स्थिति में धारण करने से दे सकता है शुभ या अशुभ परिणाम

लहसुनिया रत्न किस स्थिति में धारण करने से दे सकता है शुभ या अशुभ परिणाम

वैदिक ज्योतिष अनुसार लहसुनिया रत्न को केतु ग्रह का रत्न माना जाता है, और केतु भी राहु के समान छाया ग्रह है और राहु के सामन ही क्रूर एवं नैसर्गिक पाप ग्रह है परन्तु पाप ग्रह होते हुए भी कुछ भावों में एवं ग्रहों के साथ केतु अशुभ परिणाम नहीं देता है, यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में यह ग्रह शुभस्थ भाव में हो तो इस ग्रह का रत्न लहसुनियां धारण करने से स्वास्थ में लाभ मिलता है और कार्यो में सफलता मिलती है, धन की प्राप्ति होती है, एवं इसके साथ ही रहस्यमयी शक्ति से भी सुरक्षित रहता है।

कुंडली के इन योगों में लहसुनियां रत्न धारण करना लाभप्रद होता है –

  • यदि जातक की कुंडली में दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, नवें और दसवें भाव में यदि केतु उपस्थित हो तो लहसुनिया रत्न को धारण करना लाभकारी सिद्ध होता है।
  • यदि जातक की कुंडली के किसी भी भाव में मंगल, बृहस्‍पति और शुक्र के साथ में केतु हो तो लहसुनिया अवश्‍य धारण करना चाहिए।
  • यदि जातक की कुंडली में केतु सूर्य के साथ हो या सूर्य से दृष्‍ट हो तो भी लहसुनिया धारण करना फायदेमंद होता है।
  • यदि जातक की कुंडली में केतु शुभ भावों का स्‍वामी हो और उस भाव से छठे या आठवें स्‍थान पर बैठा हो तो भी लहसुनिया रत्न धारण किया जाना चाहिए।
  • यदि जातक की कुंडली में केतु पांचवे भाव के स्‍वामी के साथ हो या भाग्‍येश के साथ हो तो भी लहसुनिया रत्न धारण करना चाहिए।
  • यदि जातक की कुंडली में केतु धनेश, भाग्‍येश या चौथे भाव के स्‍वामी के साथ हो या उनके द्वारा देखा जा रहा हो तो भी लहसुनिया धारण करना चाहिए।
  • जातक की कुंडली में केतु की महादशा और अंतरदशा में भी लहसुनिया रत्न को धारण करना अत्‍यंत फलदायक होता है।
  • केतु से संबंधित वस्‍तुओं और इससे संबंधित स्‍थानों में उन्‍नति के लिए भी लहसुनिया धारण किया जाना चाहिए।
  • यदि जातक की कुंडली में केतु अगर शुभ ग्रहों के साथ हो तो भी लहसुनिया धारण किया जाना चाहिए।
  • यदि किसी व्यक्ति को भूत-प्रेत आदि से बहुत ज्‍यादा डर हो तो भी लहसुनिया धारण कर ऐसे डर को दूर किया जा सकता है।
  • जातक की कुंडली में केतु से होने वाली जन्‍मदोष निवृत्ति के लिए भी लहसुनिया रत्न धारण करना लाभदायक होता है।

जातकों की इन स्थितियों में लहसुनिया धारण करना लाभप्रद होता है –

  • लहसुनिया रत्न उन जातकों के लिए बेहद उत्तम होता है जो शेयर बाजार या जोखिम भरे निवेश कार्य करते हैं, तो ऐसी स्थिति में लहसुनिया रत्न की कृपा से जोखिम भरे निवेशों का कार्य कर रहे व्यक्ति का भाग्य चमकता है।
  • व्यावसायिक क्षेत्र में यदि आपकी तरक्की लंबे समय से रुकी हुई है, तो ऐसी स्थिति में भी लहसुनिया रत्न काफी लाभकारी साबित होता है, इसके प्रभाव से आपको प्रोफेशनल लाइफ में सफलता प्राप्त होती है और आपका फंसा हुआ पैसा व खोई हुई आर्थिक संपदा को भी वापस लाने में लहसुनिया रत्न लाभदायी होता है।
  • लहसुनिया रत्न को धारण करने से आप बुरी नज़र के प्रभाव से भी बचे रहते हैं।
  • केतु ग्रह का प्रभाव जातक के जीवन को बहुत संघर्ष पूर्ण बना देता है और कड़ा सबक सिखाता है, लहसुनिया केतु का ही रत्न है जो इस चुनौती भरी स्थिति में भी व्यक्ति को सुख-सुविधाओं का आनंद प्राप्त करवाता है।
  • अध्यात्म की राह पर चलने वाले व्यक्तियों के लिए भी लहसुनिया रत्न लाभकारी होता है, इसको धारण करने से सांसारिक मोह छूटता है और व्यक्ति अध्यात्म व धर्म की राह पर चलने लग जाता है।
  • लहसुनिया रत्न के प्रभाव से शारीरिक कष्ट भी दूर होते हैं जैसे कि अवसाद, लकवा व कैंसर जैसी बीमारियों में भी यह रत्न लाभदायक होता है।
  • लहसुनिया रत्न मन को शांति प्रदान करता है और इसके प्रभाव से स्मरण शक्ति तेज होती है और आप तनाव से दूर रह सकते हैं।

इस प्रकार के लहसुनिया रत्न धारण करने से हो सकती है आपको हानि –

  • यदि लहसुनिया रत्न में चमक न हो तो यह धारण करने से धन का नाश होता है।
  • यदि लहसुनिया रत्न में खड्डा या छेद हो तो वह खण्डित माना जाता है और ऐसा लहसुनिया रत्न धारण करने से शत्रुओं की संख्या में वृद्धि होती है।
  • जिस लहसुनिया रत्न में चार या इससे अधिक धारियां हो तो उसे धारण करना हानिकारक सिद्ध होता है।
  • यदि किसी लहसुनिया रत्न में सफेद छींटे हो तो उसे धारण करने से व्यक्ति को मृत्यु तुल्य कष्ट हो सकता है।
  • ऐसा लहसुनिया रत्न जिसमें जाल दिखाई दे तो उसे धारण करने से पत्नी को कष्ट मिल सकता है।
  • जिस लहसुनिया रत्न में शहद के समान छींटे हों, उसे धारण करने से राज्य व व्यापार में हानि हो सकती है।
  • धब्बा युक्त लहसुनिया रत्न को धारण करने से व्यक्ति के शरीर में रोगों की वृद्धि हो सकती है।

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