पायल की आवाज़

पायल की आवाज़

पायल की आवाज़
पायल से उत्पन्न होने वाली आवाज़ को क्रिय-शक्ति का नाम दिया गया है। इस क्रिय-शक्ति की तरंगें वातावरण से जब मिलती हैं तो उसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाती हैं। इसके अलावा यह शक्ति पांव तले आने वाली पाताल की तरंगों को रोकती है। इसी प्रकार से यह पायल ना केवल स्त्री के पांव की सुंदरता को बढ़ाती है बल्कि साथ ही उसके आसपास एक रक्षा कवच भी बनाती है।
चांदी में ‘इच्छा शक्ति’ उत्पन्न करने की ताकत होती है। इस इच्छा शक्ति की मदद से वह किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को स्त्री के आसपास नहीं फटकने देती। यह शक्ति हमेशा पायल के ईर्द-गिर्द घूमती रहती है।
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि किसी महिला का स्वास्थ्य खराब है और वह पायल पहन ले तो अपने आप ही उसकी तबीयत में सुधार आने लगता है। पायल धारण करने से उसके भीतर पनप रही सभी नकारात्मक ऊर्जा की तरंगें धीरे-धीरे बाहर आने लगती हैं।
उदाहरण के लिए यदि किसी स्त्री के पांव में सूजन आ गई है और वह उस पर पायल पहन ले तो कुछ ही घंटों में वह सूजन कम हो जाती है। यह एक जांचा-परखा उदाहरण है, जिसे देख साइंस भी हैरान है।
बिछिया पहनने से एक विवाहित स्त्री मां लक्ष्मी तथा मां सरस्वती का आशीर्वाद पाती है। यह विवाह की एक परम्परागत रीति है, जिसे हर हिन्दू स्त्री द्वारा पहना जाना आवश्यक है। यह आभूषण उस स्त्री को उसकी विवाहित मर्यादाओं को ज्ञात कराता है।
परम्पराओं के अनुसार मछली के आकार की बिछिया को काफी मान्यता हासिल है। ऐसा माना जाता है कि यह खास प्रकार की बिछिया स्त्री के कई रोग नष्ट करती है।

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