ज्योतिष : अद्वैत का विज्ञान- ओशो

ज्योतिष : अद्वैत का विज्ञान- ओशो

??? ज्योतिष : एक पुरातन विज्ञान ???

मैं भगवान श्री के चरणों में निवेदन करूंगा कि हम एक नये विषय पर आप से मार्गदर्शन चाहते हैं और वह विषय है ज्योतिष। यह अछूता विषय है और भगवान श्री के श्रीमुख से इस पर कभी चर्चा नहीं हुई है। मैं भगवान श्री के चरणों में पुन: निवेदन करता हूं कि आज आप ज्योतिष के संबंध में हमें कुछ कहें।
ज्‍योतिष शायद सबसे पुराना विषय है और एक अर्थ में सबसे ज्यादा तिरस्कृत विषय भी है। सबसे पुराना इसलिए कि मनुष्य जाति के इतिहास की जितनी खोजबीन हो सकी उसमें ऐसा कोई भी समय नहीं था जब ज्योतिष मौजूद न रहा हो। जीसस से पच्चीस हजार वर्ष पूर्व सुमेर में मिले हुए हड्डी के अवशेषों पर ज्योतिष के चिन्ह अंकित है। पश्‍चिम में, पुरानी से पुरानी जो खोजबीन हुई है, वह जीसस से पच्चीस हजार वर्ष पूर्व इन हड्डियों की है। जिन पर ज्योतिष के चिह्न और चंद्र की यात्रा के चिह्न अंकित हैं। लेकिन भारत में तो बात और भी पुरानी है।

ऋग्वेद में पच्चान्नबे हजार वर्ष पूर्व ग्रह—नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी उसका उल्लेख है। इसी आधार पर लोकमान्य तिलक ने यह तय किया था कि ज्योतिष नब्बे हजार वर्ष से ज्यादा पुराने तो निश्‍चित ही होने चाहिए। क्योंकि वेद में यदि पच्चान्नबे हजार वर्ष पहले जैसे नक्षत्रों की स्थिति थी, उसका उल्लेख है, तो वह उल्लेख इतना पुराना तो होगा ही। क्योंकि उस समय जो स्थिति थी नक्षत्रों की उसे बाद में जानने का कोई भी उपाय नहीं था। अब जरूर हमारे पास ऐसे वैज्ञानिक साधन उपलब्ध हो सके हैं कि हम जान सकें अतीत में कि नक्षत्रों की स्थिति कब कैसी रही होगी।

ज्योतिष की सर्वाधिक गहरी मान्यताएं भारत में पैदा हुईं। सच तो यह है कि ज्योतिष के कारण ही गणित का जन्म हुआ। ज्योतिष की गणना के लिए ही सबसे पहले गणित का जन्म हुआ। और इसीलिए अंकगणित के जो अंक है वे भारतीय हैं,सारी दुनिया की भाषाओं में। एक से लेकर नौ तक जो गणना के अंक हैं, वे समस्त भाषाओं में जगत की, भारतीय है। और सारी दुनिया में नौ डिजिट या नौ अंक स्वीकृत हो गए हैं। वे नौ अंक भारत में पैदा हुए और धीरे— धीरे सारे जगत में फैल गए।

जिसे आप अंग्रेजी में नाइन कहते हैं वह संस्कृत के नौ का ही रूपांतरण है। जिसे आप एट कहते है, वह संस्कृत के अष्ट का ही रूपान्तरण है। एक से लेकर नौ तक जगत की समस्त सभ्य भाषाओं में गणित के नौ अंकों का जो प्रचलन है वह भारतीय ज्योतिष के प्रभाव में ही हुआ है।

भारत से ज्योतिष की पहली किरणें सुमेर की सभ्यता में पहुंचीं। सुमेरवासियो ने सबसे पहले, ईसा से छह हजार वर्ष पूर्व पश्‍चिम के जगत के लिए ज्योतिष का द्वार खोला। सुमेरवासियो ने सबसे पहले नक्षत्रों के वैज्ञानिक अध्ययन की आधार शिलाएं रखीं। उन्होंने बड़े ऊंचे, सात सौ फीट ऊंचे मीनार बनाए और उन मीनारों पर सुमेर के पुरोहित चौबीस घण्टे आकाश का अध्ययन करते थे।

दो कारणों से— एक तो सुमेर के तत्वविदों को इस गहरे सूत्र का पता चल गया था कि मनुष्य के जगत में जो भी घटित होता है, उस घटना का प्रारंभिक स्रोत नक्षत्रों से किसी न किसी भांति सम्बन्धित है।

जीसस से छह हजार वर्ष पहले सुमेर में यह धारणा थी कि पृथ्वी पर जो भी बीमारी पैदा होती है, जो भी महामारी पैदा होती है वह सब नक्षत्रों से सम्बन्धित है। अब तो इसके लिए वैज्ञानिक आधार भी मिल गए है। और जो लोग आज के विज्ञान को समझते हैं वे कहते हैं कि सुमेरवासियों ने मनुष्य जाति का असली इतिहास प्रारंभ किया। इतिहासज्ञ कहते हैं कि सब तरह का इतिहास सुमेर से शुरू होता है।

उन्नीस सौ बीस में चीजेवस्की नाम के एक रूसी वैज्ञानिक ने इस बात की गहरी खोजबीन शुरू की और पाया कि सूरज पर हर ग्यारह वर्षों में पीरियोडिकली बहुत बड़ा विस्फोट होता है। सूर्य पर हर ग्यारह वर्ष में आणविक विस्फोट होता है। और चीजेवस्की ने यह पाया कि जब भी सूरज पर ग्यारह वर्षों में आणविक विस्फोट होता है तभी पृथ्वी पर युद्ध और क्रांतियों के सूत्रपात होते हैं। और उसके अनुसार विगत सात सौ वर्षों के लम्बे इतिहास में सूर्य पर जब भी कभी ऐसी घटना घटी है, तभी पृथ्वी पर दुर्घटनाएं घटी हैं।

चीजेवस्की ने इसका ऐसा वैज्ञानिक विश्लेषण किया था कि स्टैलिन ने उसे उन्नीस सौ बीस में उठाकर जेल मैं डाल दिया था। स्टैलिन के मरने के बाद ही चीजेवस्की छूट सका। क्योंकि स्टैलिन के लिए तो अजीब बात हो गयी! मार्क्स का और कम्‍युनिस्‍टों का खयाल है कि पृथ्वी पर जो क्रांतियां होती हैं उनका मूल कारण मनुष्य—मनुष्य के बीच आर्थिक वैभिन्य है। और चीजेवस्की कहता हैं कि क्रांतियों का कारण सूरज पर हुए विस्फोट हैं।

अब सूरज पर हुए विस्फोट और मनुष्य के जीवन की गरीबी और अमीरी का क्या संबंध? अगर चीजेवस्की ठीक कहता है तो मार्क्स की सारी की सारी व्याख्या मिट्टी में चली जाती है। तब क्रांतियों का कारण वगीर्य नहीं रह जाता, तब क्रांतियों का कारण ज्योतिषीय हो जाता है। चीजेवस्की को गलत तो सिद्ध नहीं किया जा सका क्योंकि सात सौ साल की जो गणना उसने दी थी इतनी वैज्ञानिक थी और सूरज में हुए विस्फोटों के साथ इतना गहरा संबंध उसने पृथ्वी पर घटने वाली घटनाओं का स्थापित किया था कि उसे गलत सिद्ध करना तो कठिन था। लेकिन उसे साइबेरिया में डाल देना आसान था।

स्टैलिन के मर जाने के बाद ही चीजेवस्की को खूश्चेव साइबेरिया से मुक्त कर पाया। इस आदमी के जीवन के कीमती पचास साल साइबेरिया में नष्ट हुए। छूटने के बाद भी वह चार—छह महीने से ज्यादा जीवित नहीं रह सका। लेकिन छह महीने में भी वह अपनी स्थापना के लिए और नये प्रमाण इकट्ठे कर गया। पृथ्वी पर जितनी महामारियां फैलती हैं, उन सबका संबंध भी वह सूरज से जोड़ गया है।

सूरज, जैसा हम साधारणत: सोचते हैं ऐसा कोई निष्कि्रय अग्नि का गोला नहीं है, वरन अत्यन्त सक्रिय और जीवन्त अग्‍नि—संगठन है। और प्रतिपल सूरज की तरंगों में रूपांतरण होते रहते हैं। और सूरज की तरंगों का जरा—सा रूपांतरण भी पृथ्वी के प्राणों को कंपित करता है। इस पृथ्वी पर कुछ भी ऐसा घटित नहीं होता जो सूरज पर घटित हुए बिना घटित हो जाता हो।

जब सूर्य का ग्रहण होता है तो पक्षी जंगलों में गीत गाना चौबीस घण्टे पहले से ही बन्द कर देते हैं। पूरे ग्रहण के समय तो सारी पृथ्वी मौन हो जाती है, पक्षी गीत गाना बन्द कर देते हैं और सारे जंगलों के जानवर भयभीत हो जाते हैं, किसी बड़ी आशंका से पीड़ित हो जाते हैं।

बन्दर वृक्षों को छोड्कर नीचे आ जाते हैं। वे भीड़ लगाकर किसी सुरक्षा का उपाय करने लगते है। और एक आश्रर्य कि बन्दर जो निंरत्तर बातचीत और शोर—गुल में लगे रहते हैं, सूर्य ग्रहण के वक्त इतने मौन हो जाते हैं जितने कि साधु और संन्यासी भी ध्यान में नहीं होते हैं! चीजेवस्की ने ये सारी की सारी बातें स्थापित की हैं।

सुमेर में सबसे पहले यह खयाल पैदा हुआ था। फिर उसके बाद पैरासेल्सस नाम के स्विस चिकित्सक ने इसकी पुर्नस्थापना की। उसने एक बहुत अनूठी मान्यता स्थापित की, और वह मान्यता आज नहीं तो कल समस्त चिकित्सा विज्ञान को बदलनेवाली सिद्ध होगी। अब तक उस मान्यता पर बहुत जोर नहीं दिया जा सका क्योंकि ज्योतिष तिरस्कृत विषय है—सर्वाधिक पुराना, लेकिन सर्वाधिक तिरस्कृत, यद्यपि सर्वाधिक मान्य भी।

अभी फ्रांस में पिछले वर्ष गणना की गई तो सैंतालिस प्रतिशत लोग ज्योतिष में विश्वास करते हैं कि वह विज्ञान है—फ्रांस में! अमरीका में पांच हजार बड़े ज्योतिषी दिन रात काम में लगे रहते हैं। और उनके पास इतने गाहक हैं कि वे पूरा काम भी निपटा नहीं पाते हैं। करोड़ों डालर अमरीका प्रति वर्ष ज्योतिषियों को चुकाता है। अन्दाज है कि सारी पृथ्वी पर कोई अठहत्तर प्रतिशत लोग ज्योतिष में विश्वास करते हैं। लेकिन वे अठहत्तर प्रतिशत लोग सामान्य हैं। वैज्ञानिक, विचारक, शुइद्धवादी ज्योतिष की बात सुनकर ही चौक जाते हैं।

सी. जी. जुग ने कहा है कि तीन सौ वर्षों से विश्वविद्यालयों के द्वार ज्योतिष के लिए बन्द हैं, यद्यपि आनेवाले तीस वर्षों में ज्योतिष इन बन्द दरवाजों को तोड़कर विश्वविद्यालयों में पुन: प्रवेश पाकर रहेगा। प्रवेश पाकर रहेगा इसलिए कि ज्योतिष के संबंध में जो—जो दावे किए गए थे उनको अब तक सिद्ध करने का उपाय नहीं था, लेकिन अब उनको सिद्ध करने का उपाय है।

– ओशो

Top ten astrologers in India – get online astrology services from best astrologers like horoscope services, vastu services, services, numerology services, kundli services, online puja services, kundali matching services and Astrologer,Palmist & Numerologist healer and Gemstone,vastu, pyramid and mantra tantra consultant

Translate
X