अंगारक

अंगारक

किसी इंसान की कुण्डली में क्षत्रिय प्रकृति का ग्रह मंगल जब असुर प्रकृति वाले राहु अथवा केतु के साथ संयोग करे तो एक विशेष प्रकार का योग “अंगारक” निर्मित होता है। मंगल तथा राहु-केतु का संबंध उनके एक ही भाव में साथ बैठने से बन सकता है अथवा एक-दूसरे से दृष्टिगत संबंध भी बन सकता है।
क्या करता है अंगारक योग?
अंगारक योग जैसा की नाम से ही स्पष्ट है अग्नि का द्योतक है।
यानि मंगल जो कि अग्नि का कारक ग्रह है, राहु नामक वायुवीय ग्रह के साथ संयोग कर अपने दुष्प्रभाव में भारी बढ़ोत्तरी कर लेता है। ऐसे में पीड़ित जातक हिंसात्मक अपराधी, कुप्रवृत्तियों में संलग्न, आचरणहीन, व्यभिचार में रत, दूसरों का बुरा चाहने वाला स्वार्थी किस्म का बन जाता है। ऐसे जातकों को समाज में अराजकता फैलाने में मज़ा आने लगता है तथा अक्सर ऐसे जातक सामूहिक हत्याकाण्ड को भी अंजाम देने में संकोच नहीं करते हैं। ऐसे जातकों की एक और खासियत होती है कि वे दूसरों के धन पर आश्रित होकर भी उन्हीं का अहित कर बैठते हैं।
किंतु केवल अशुभ ही नहीं होता अंगारक योग
ख्याल रहे कि यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल तथा राहु या केतु में दोनों शुभ हो, केवल एक शुभ हो तब ऐसी स्थिति में शुभ प्रभाव वाले अंगारक योग का निर्माण होता है। ऐसा योग जातक को न्यायप्रिय, सहयोगी, जनप्रिय, सेनाधिकारी, पुलिस उच्चाधिकारी अथवा प्रशासनिक अभिकर्ता बना देता है।
कैसे शांत रखें अशुभ अंगारक योग
यदि किसी जातक को अंगारक योग के दुष्प्रभाव से जूझना पड़ रहा है तब उसे ऐसी अवस्था में मंगल तथा राहु को शांत रखना होगा। यानि विधिपूर्वक हनुमत आराधना से ये दोनों ग्रह पीड़ामुक्त होंगे तथा राहु के बीज मंत्र का शास्र्आ सम्मत संख्या में उच्चारण सहित मंगल व राहु के लिए निर्दिष्ट दान करना सही रहेगा……..

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